Click here
alt alt alt alt alt

Top Donators List

  • नीरज पाण्डेय
  • Donator-2
  • Donator-3
  • Donator-4
  • Donator-5
  • Donator-6
  • Donator-7
  • Donator-8
  • Donator-9

Donations


Upcoming Program

  • PROGRAM!
  • PROGRAM!
  • PROGRAM!
  • PROGRAM!

पंचशील मिशन में आप सभी का हार्दिक अभिनंदन है।

अनंत अविनाशी ईश्वर ने पंच तत्व से सृष्टि का निर्माण किया और इस सृष्टि की रक्षा अनंत काल तक होती रहे इसके लिए इसी पंच तत्व से जीव का निर्माण किया और इस जीव का अस्तित्व अनंत काल तक सृष्टि में बना रहे इसके लिए उसने दो जाति बनाई, एक नर और मादा। शास्त्र के अनुसार इस सृष्टि में तीन लाख चौरासी हजार योनिया है और इन सभी में केवल दो ही जाति है वो है नर और मादा, और यही दोनों आपसी सहयोग से अपनी अपनी संख्या बढ़ाने लगे और ईश्वर की भी यही सोच थी। लेकिन इन समस्त योनियों में मनुष्य कृति ईश्वर की सबसे सुन्दर कृति थी। सुन्दर इसलिए थी की इसके अंदर सोचने की शक्ति सबसे ज्यादा थी और शायद यही वजह थी की मानव जीव आवश्यकता के अनुसार अपनी बुद्धि को विकसित करता चला गया और सभी जीवों में श्रेष्ठ भी हो गया।

तमाम इतिहास की सभ्यताएं प्रमाण देती है की समस्त जीव तो प्रकृति पर ही निर्भर रह गए लेकिन मानव ने अपनी आवश्यकता अनुसार समय समय पर नए नए अविष्कार किया, जैसे - पेट भरने के लिए तो कुछ दिन तक प्रकृति पर ही निर्भर था बाद में अनाज उगाना सीख लिया। कुछ दिन तक कच्चा अनाज ही खाता रहा मगर बाद में उसे पकाने के लिए आग की भी खोज कर लिया। शुरुआत में तो ये जीव निर्वस्त्र ही विचरण करता था मगर बाद में पेड़ो के पत्तों से तन ढकना सिख गया और बाद में कपड़ा पहनना भी सिख गया यानि मानव ही समस्त जीवों में सबसे तेज और निरंतर परिवर्तन करता रहा। और इस समस्त परिवर्तनों को देख कर ईश्वर को भी गर्व हुआ होगा लेकिन मानव की तीव्र बुद्धि ने एक बड़ा अजीब और विनाश कारी अविष्कार किया, वो आविष्कार था- लालच का, वो आविष्कार था- सीमाओं के विस्तार का ,वो आविष्कार था- दूसरों को जीत कर उन्हें गुलाम बनाने का, वो आविष्कार था- हारे हुए लोगों को दास बनाने का, वो आविष्कार था- दास बने लोगो को जात-पात, उंच-नींच, भेद-भाव, धर्म संप्रदाय में बांट कर उन पर शासन करने का आदि आदि अनेको ऐसे अविष्कार जिसे देख कर इस सृष्टि का रचन हार भी बिलकुल स्तब्ध, हैरान, परेशान की अरे ये क्या ? मेरी इस सृष्टि की सबसे सुन्दर कृति इतनी विकृत कैसे हो गयी... और ईश्वर के लिए सबसे आश्चर्य की बात तो ये थी की सृष्टि के जिस टुकड़े को वो सबसे सुन्दर मानता था उसी का विनाश सबसे पहले शुरू हुआ वह है- भारत भूमि ……। क्योंकि आज सबसे ज्यादा जात-पात का भेद-भाव भारत में, उंच -नीच का भेद-भाव भारत में, अमीरी गरीबी का भेद-भाव भारत में, धर्म संप्रदाय का भेद-भाव भारत में, गरीबी भुखमरी भारत में, भ्रष्टाचार भारत में …।

इसलिए हे भारत भूमि के लोगों आइये पंचशील मिशन के साथ मिलकर धर्म और मजहब को मिटा कर....जात-पात को मिटा कर भ्रष्टाचार और भूखमरी को समाप्त कर सुन्दर भारत का निर्माण किया जाये।

“पंचशील का है अभियान, मानवता का हो कल्याण”